Tag Archives: symbol of love

दिखाई दिए यूँ – with just a glimpse

फकीराना आये सदा कर चले,
मियाँ खुश रहो हम दुआ कर चले

जो तुझ बिन जीने को कहते थे हम,
सो इस अह्द को अब वफ़ा कर चले

कोई ना-उम्मीदाना करते निगाह,
सो तुम हम से भी मुंह छिपा कर चले

बहुत आरजू थी गली की तेरी,
सो यहाँ से लहू में नहा कर चले

दिखाई दिए यूँ के बेखुद किया,
हमें आप से भी जुदा कर चले

जबीं सिजदा करते ही करते गयी,
हक-ऐ-बंदगी हम अदा कर चले

परस्तश की यान taeen ke ai but तुझे, (issues with devnagri)
नज़र में शबों की खुदा कर चले

-मीर तकी मीर (खुदा-ऐ-सुखन)

An english translation of the same

Mendicant like i came and part,
Praying that you be blessed

Without you i will not live,
Behold, this pledge i now redeem

An unhopeful glance i could have cast,
But you hid your face walking me past

To visit your street, i deeply wished,
I leave it bathed in blood

with just a glimpse, you left me entranced,
estranged from self, i have been since

A long obeisance was my life,
My debt of homage i have paid

I adored you,love, so deep and true,
That people took you for god

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बस इक लम्हे का झगड़ा था


बस इक लम्हे का झगड़ा था –
दरो-दीवार पे ऐसे छनाके से गिरी आवाज़ जैसे काँच गिरता है –
हर इक शै में गयीं उडती हुई, जलती हुई किरचें!
नज़र में, बात में, लहजे में, सोच और साँस के अन्दर |
लहू होना था इक रिश्ते का, सो वह हो गया उस दिन
उसी आवाज़ के टुकड़े उठा के फ़र्श से उस शब,
किसी ने काट ली नब्ज़ें – 
न की आवाज़ तक कुछ भी,

कि कोई जाग न जाये


An English Translation

A mere one-moment tiff –
And the voice crashed on the walls like a glass shatters –
The splinters, stinging, flew into everything
In our eyes, in our conversation and its tone, in our thoughts and breaths even |
A relation was to be murdered, and that happened eventually –

Using a fragment of that very voice, that night,
Someone slit their veins –
Not making the slightest noise,
Lest someone wakes up


The same was recited by Dia Mirza for “Dus Kahaniyaan(2007)” album.

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रात आधी खिंच कर मेरी हथेली

हरिवंश राय बच्चन

रात आधी खिंच कर मेरी हथेली
एक ऊँगली से लिखा था प्यार तुमने|

फांसला था कुछ हमारे बिस्तरों में
और चारों ओर दुनिया सो रही थी|
तारीकिया ही गगन की जानती है
जो दशा दिल की तुम्हारी हो रही थी|
मैं तुम्हारे पास होकर दूर तुमसे
अद्जगा सा और अद्सोया हुआ सा |
रात आधी खिंच कर मेरी हथेली
एक ऊँगली से लिखा था प्यार तुमने|

एक बिजली छु गयी सहसा जगा मैं
कृष्णपक्षी चाँद निकला था गगन में|
इस तरह करवट पड़ी थी तुम के आंसू
बह रहे थे इस नयन से उस नयन में|
में लगा दू आँग उस संसार में
है प्यार जिसमे इस तरह असमर्थ-कातर|
जानती हो उस समय क्या कर गुजरने के लिए
था कर दिया तैयार तुमने|
रात आधी खींच कर मेरी हथेली
एक ऊँगली से लिखा था प्यार तुमने|

प्रात: ही की ओर को है रात चलती
और उजाले में अँधेरा डूब जाता|
मंच हे पूरा बदलता कौन ऐसे
खूबियों के साथ परदे को उठाता|
एक चेहरा सा लगा तुमने लिया था
और मैंने था उतारा इक चेहरा |
वो निशा का स्वप्न मेरा था के अपने
पर गज़ब का था किया अधिकार तुमने|
रात आधी खींच कर मेरी हथेली
एक ऊँगली से लिखा था प्यार तुमने |

और उतने फासले पर आज तक
सौ यातना कर के भी न आए फिर कभी हम
फिर न आया वक़्त वैसा फिर न मौका उस तरह का
फिर न लौटा चाँद निर्मम
और अपनी वेदना में क्या बताऊँ !
क्या नहीं ये पंक्तियाँ खुद बोलती हैं ?
बुझ नहीं पाया अभी तक उस समय जो
रख दिया था हाथ पर अंगार तुमने |
रात आधी खींच कर मेरी हथेली
एक ऊँगली से लिखा था प्यार तुमने|

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Taj Mahal

The Taj, mayhap, to you may seem, a mark of love supreme
You may hold this beauteous vale in great esteem;
Yet, my love, meet me hence at some other place!

How odd for the poor folk to frequent royal resorts;
‘Tis strange that the amorous souls should tread the regal paths
Trodden once by mighty kings and their proud consorts.
Behind the facade of love my dear, you had better seen,
The marks of imperial might that herein lie screen
You who take delight in tombs of kings deceased,
Should have seen the hutments dark where you and I did wean.
Countless men in this world must have loved and gone,
Who would say their loves weren’t truthful or strong?
But in the name of their loves, no memorial is raised
For they too, like you and me, belonged to the common throng.

These structures and sepulchres, these ramparts and forts,
These relics of the mighty dead are, in fact, no more
Than the cancerous tumours on the face of earth,
Fattened on our ancestor’s very blood and bones.
They too must have loved, my love, whose hands had made,
This marble monument, nicely chiselled and shaped
But their dear ones lived and died, unhonoured, unknown,
None burnt even a taper on their lowly graves.

This bank of Jamuna, this edifice, these groves and lawns,
These carved walls and doors, arches and alcoves,
An emperor on the strength of wealth, Has played with us a cruel joke.
Meet me hence, my love, at some other place.

Translation by K.C. Kanda, appeared in Masterpieces of Urdu Nazm published by Sterling Publishers Pvt. Ltd.

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ताजमहल – ये चमनज़ार यह जमुना का किनारा ये महल

ताज तेरे लिए इक मजहर-ऐ-उल्फत ही सही
तुझ को इस वादी-ऐ-रंगीन से अकीदत ही सही

मेर्री मेहबूब कहीं और मिला कर मुझ से

बज़्म-ऐ-शाही में ग़रीबों का गुज़र क्या मा’अनी
सब्त जिस राज पे हों सतवत-ऐ-शाही के निशाँ
उस पे उल्फत भरी रूहों का सफ़र क्या मा’अनी

मेरी महबूब पास-ऐ-पर्दा-ऐ-ताश-हीर-ऐ-वफ़ा
तू ने सतवत के निशानों को तो देखा होता
मुर्दा शाहों के मकाबिर से बहलने वाली
अपने तारीक मकानों को तो देखा होता

अनगिनत लोगों ने दुनिया में मुहब्बत की है
कौन कहता है की सादिक न थे जज्बे उन के
लेकिन उन के लिए ताश-हीर का सामान नहीं
क्यूँ के वो लोग भी अपनी ही तरह मुफलिस थे

ये इमारात-ओ-मकाबिर ये फ़सीलें,ये हिसार
मुतला-कुल्हुक्म शहंशाहों की अजमत के सुतून
दामन-ऐ-दहर पे उस रंग की गुलकारी है
जिस में सामिल है तेरे और मेरे अजदाद का खून

मेरी महबूब! उन्हें भी तो मुहब्बत होगी
जिनकी सन्ना-ई ने बख्शी है इसे शक्ल-जमील
उन के प्यारों के मकाबिर रहे बेनाम-ओ-नमूद
आज तक उन पे जल्ला-ई न किसी ने कंदील

ये चमनज़ार यह जमुना का किनारा ये महल
ये मुनक्क़श दर-ओ-दीवार, यह मेहराब ये ताक
इक शहंशाह ने दौलत का सहारा ले कर
हम ग़रीबों की मुहब्बत का उराया है मजाक

मेरी महबूब कहीं और मिला कर मुझ से!

–साहिर लुधियानवी(Sahir Ludhianvi 1921-1980)

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