Category Archives: Music

दिल का हाल सुने दिलवाला


दिल का हाल सुने दिलवाला, सीधी सी बात न मिर्च मसाला
कहके रहेगा कहनेवाला, दिल का हाल सुने दिलवाला

छोटे से घर में गरीब का बेटा, मैं भी हूँ माँ के नसीब का बेटा (२)
रंज-ओ-ग़म बचपन के साथी, आँधियों में जली जीवन बाती
भूख ने हैं बड़े प्यार से पाला, दिल का हाल सुने दिलवाला

हाय करूँ क्या सूरत ऐसी, गांठ के पूरे चोर के जैसी – (२)
चलता फिरता जानके एक दिन, बिना देखे पहचान के एक दिन
बांध के ले गया पुलिसवाला, दिल का हाल सुने दिलवाला

बूढ़े दारोगा ने चश्मे से देखा, आगे से देखा पीछे से देखा
ऊपर से देखा नीचे से देखा ,बोला ये क्या कर बैठे घोटाला – (२)
ये तो है थानेदार का साला, दिल का हाल सुने दिलवाला

ग़म से अभी आज़ाद नहीं मैं ,ख़ुश हूँ मगर आबाद नहीं मैं (२)
मंज़िल मेरे पास खड़ी है, पाँव में लेकिन बेड़ी पड़ी है
टांग अढा़ता है दौलतवाला, दिल का हाल सुने दिलवाला

सुन लो मगर ये किसी से न कहना, तिनके का लेके सहारा न बहना (२)
बिन मौसम मलहार न गाना ,आधी रात को मत चिल्लाना
वरना पकड़ लेगा पुलिसवाला, दिल का हाल सुने दिलवाला
शैलेन्द्र
Shree 420 -1955


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मैं और मेरी तनहाई अक्सर ये बातें करते है



मैं और मेरी तनहाई अक्सर ये बातें करते है
तुम होती तो कैसा होता
तुम ये कहती तुम वो कहती
तुम इस बात पे हैरां होती
तुम उस बात पे कितनी हँसती
तुम होती तो ऐसा होता
तुम होती तो वैसा होता
मैं और मेरी तनहाई अक्सर ये बातें करते है
ये रात है या जुल्फ़े तुम्हारी खुली हुई
है चांदनी या तुम्हारी नज़रों से मेरी रातें धुली हुई
ये चाँद है या तुम्हारा कंगन
सितारें है या तुम्हारा आँचल
हवा का झोका है या तुम्हारे बदन की खुशबू
ये पत्तों की है सरसराहट
या तुमने चुपके से कुछ कहा है
ये सोचता हूँ मैं कबसे गुमसुम
की जबकि मुझको भी ये खबर है तुम नहीं हो……कही नहीं हो
मगर ये दिल है की कह रहा है
तुम यही हो यही कही हो
मजबूर ये हालत इधर भी है उधर भी है
तनहाई की एक रात इधर भी है उधर भी है
कहने को बहुत कुछ है मगर किस से कहे हम
कब तक यूँही खामूश रहे है और सहे हम
दिल कहता है दुनिया की हर एक रसम को उठा दे
दीवार जो हम दोनों में है गिरा दे
क्यूँ दिल मैं सुलगते रहे लोगों को बता दें
हाँ हम को मोहब्बत है मोहब्बत है मोहब्बत
अब दिल में ये बात इधर भी है उधर भी है
जाँवेद अख्तर

English Translation:
Me and my loneliness often have this conversation
how would it be to have you, you would say this, you would say that
you would be shocked to hear this, you would laugh to hear that
it would be like this if you would be here, it would’ve been like that if you would be here
Me and my loneliness often have this conversation

Is is the night or is your hair open
Is it the moonlight or your eyesight in which my night’s set
Is it the moon or your bangle
Are they stars or your shawl
Is it the breeze or the aroma of your body
Is it the sound of the leaves
Or you have quietly said something
I have been thinking quietly
Though I am well aware
That you are not around, not there at all
But this heart which is telling me
That you are here, somewhere around her
Difficult situation is present in this place too and there too
Lonely night is present here also, there also
There are so many things to be said
But, to whom shall i say
Till when can i stay silent and tolerate
Heart says that i should cross every tradition present in this world
Break the walls between the both of us today
Why should we leave it in our hearts
Lets tell the people
Yes, we are in love, we are in love, love
Now the same thoughts present in my heart are here also, there also

IMDB Link: Silsila 1981

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दिखाई दिए यूँ – with just a glimpse


फकीराना आये सदा कर चले,
मियाँ खुश रहो हम दुआ कर चले

जो तुझ बिन जीने को कहते थे हम,
सो इस अह्द को अब वफ़ा कर चले

कोई ना-उम्मीदाना करते निगाह,
सो तुम हम से भी मुंह छिपा कर चले

बहुत आरजू थी गली की तेरी,
सो यहाँ से लहू में नहा कर चले

दिखाई दिए यूँ के बेखुद किया,
हमें आप से भी जुदा कर चले

जबीं सिजदा करते ही करते गयी,
हक-ऐ-बंदगी हम अदा कर चले

परस्तश की यान taeen ke ai but तुझे, (issues with devnagri)
नज़र में शबों की खुदा कर चले

-मीर तकी मीर (खुदा-ऐ-सुखन)

An english translation of the same

Mendicant like i came and part,
Praying that you be blessed

Without you i will not live,
Behold, this pledge i now redeem

An unhopeful glance i could have cast,
But you hid your face walking me past

To visit your street, i deeply wished,
I leave it bathed in blood

with just a glimpse, you left me entranced,
estranged from self, i have been since

A long obeisance was my life,
My debt of homage i have paid

I adored you,love, so deep and true,
That people took you for god

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ताजमहल – ये चमनज़ार यह जमुना का किनारा ये महल


ताज तेरे लिए इक मजहर-ऐ-उल्फत ही सही
तुझ को इस वादी-ऐ-रंगीन से अकीदत ही सही

मेर्री मेहबूब कहीं और मिला कर मुझ से

बज़्म-ऐ-शाही में ग़रीबों का गुज़र क्या मा’अनी
सब्त जिस राज पे हों सतवत-ऐ-शाही के निशाँ
उस पे उल्फत भरी रूहों का सफ़र क्या मा’अनी

मेरी महबूब पास-ऐ-पर्दा-ऐ-ताश-हीर-ऐ-वफ़ा
तू ने सतवत के निशानों को तो देखा होता
मुर्दा शाहों के मकाबिर से बहलने वाली
अपने तारीक मकानों को तो देखा होता

अनगिनत लोगों ने दुनिया में मुहब्बत की है
कौन कहता है की सादिक न थे जज्बे उन के
लेकिन उन के लिए ताश-हीर का सामान नहीं
क्यूँ के वो लोग भी अपनी ही तरह मुफलिस थे

ये इमारात-ओ-मकाबिर ये फ़सीलें,ये हिसार
मुतला-कुल्हुक्म शहंशाहों की अजमत के सुतून
दामन-ऐ-दहर पे उस रंग की गुलकारी है
जिस में सामिल है तेरे और मेरे अजदाद का खून

मेरी महबूब! उन्हें भी तो मुहब्बत होगी
जिनकी सन्ना-ई ने बख्शी है इसे शक्ल-जमील
उन के प्यारों के मकाबिर रहे बेनाम-ओ-नमूद
आज तक उन पे जल्ला-ई न किसी ने कंदील

ये चमनज़ार यह जमुना का किनारा ये महल
ये मुनक्क़श दर-ओ-दीवार, यह मेहराब ये ताक
इक शहंशाह ने दौलत का सहारा ले कर
हम ग़रीबों की मुहब्बत का उराया है मजाक

मेरी महबूब कहीं और मिला कर मुझ से!

–साहिर लुधियानवी(Sahir Ludhianvi 1921-1980)

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does the sky ever grieve?


This is englsih Translation of जो बीत गई सो बात गई

There was a star in life
agreed, it was much loved
when it sank, it did sink.
Look at the sky’s vastness,
so many stars have broken away
so many loved ones it has lost
the lost ones, were they ever found?
But tell me, for the broken stars
does the sky ever grieve?
That which is past, is gone.

There was a flower in life
which, I doted everyday on
when it dried, it dried away.
Look at the garden’s breast,
dried, many of its saplings have
welted, many of its flowers have
that which welted, did it ever bloom?
But tell me, for dried flowers
does the garden create an uproar?
That which is past, is gone.

There was a cup of wine in life
which, you gave your heart and soul for
when it broke, it did break.
Look at the winehouse’s courtyard
shaken, where many cups are
fall, and merge with the ground
that which fall, do they ever rise?
But tell me, for broken cups
does the winehouse ever regret?
That which is past, is gone.

Soft mud, we are made of,
wine drops do tend to fall.
A short life, we have come with,
winecups do tend to break.
Yet, inside the winehouse
there is a winepot, there are winecups.
Those, struck by intoxication
do splurge away on the wine.
He’s a raw drinker,
whose affection escapes no cup,
one who has burnt from true wine
does he ever shout, or scream?
That which is past, is gone.

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जो बीत गई सो बात गई


जीवन में एक सितारा था
माना वह बेहद प्यारा था
वह डूब गया तो डूब गया
अंबर के आंगन को देखो
कितने इसके तारे टूटे
कितने इसके प्यारे छूटे
जो छूट गए फ़िर कहाँ मिले
पर बोलो टूटे तारों पर
कब अंबर शोक मनाता है
जो बीत गई सो बात गई

जीवन में वह था एक कुसुम
थे उस पर नित्य निछावर तुम
वह सूख गया तो सूख गया
मधुबन की छाती को देखो
सूखी कितनी इसकी कलियाँ
मुरझाईं कितनी वल्लरियाँ
जो मुरझाईं फ़िर कहाँ खिलीं
पर बोलो सूखे फूलों पर
कब मधुबन शोर मचाता है
जो बीत गई सो बात गई

जीवन में मधु का प्याला था
तुमने तन मन दे डाला था
वह टूट गया तो टूट गया
मदिरालय का आंगन देखो
कितने प्याले हिल जाते हैं
गिर मिट्टी में मिल जाते हैं
जो गिरते हैं कब उठते हैं
पर बोलो टूटे प्यालों पर
कब मदिरालय पछताता है
जो बीत गई सो बात गई

मृदु मिट्टी के बने हुए हैं
मधु घट फूटा ही करते हैं
लघु जीवन ले कर आए हैं
प्याले टूटा ही करते हैं
फ़िर भी मदिरालय के अन्दर
मधु के घट हैं,मधु प्याले हैं
जो मादकता के मारे हैं
वे मधु लूटा ही करते हैं
वह कच्चा पीने वाला है
जिसकी ममता घट प्यालों पर
जो सच्चे मधु से जला हुआ
कब रोता है चिल्लाता है
जो बीत गई सो बात गई

-हरीवंश राय बच्चन

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विहाग – महादेवी वर्मा


वनमाला के गीतों-सा
निर्जन में बिखरा है मधुमास,
इन कुंजो में खोज रहा है
सुना कोना मंद बतास;

नीरव नभ के नयन पर
हिलती है रजनी की अलके ,
जाने किसका पंथ देखती
बिछ कर फूलों की पलके|

मधुर चांदनी धो जाती है
खाली कलियों के प्याले,
बिखरे से है तार आज
मेरी वीणा के मतवाले;

पहली-सी झंकार नहीं है
और नहीं वह मादक राग,
अतिथि| किन्तु सुनते जाओ
टूटे तारों का करुण विहाग

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Fancy


John Keats(1795-1821)

Ever let the Fancy roam,
Pleasure never is at home:
At a touch sweet Pleasure melteth,
Like to bubbles when rain pelteth;
Then let winged Fancy wander
Through the thought still spread beyond her:
Open wide the mind’s cage-door,
She’ll dart forth, and cloudward soar.
O sweet Fancy! let her loose;
Summer’s joys are spoilt by use,
And the enjoying of the Spring
Fades as does its blossoming;
Autumn’s red-lipp’d fruitage too,
Blushing through the mist and dew,
Cloys with tasting: What do then?
Sit thee by the ingle, when
The sear faggot blazes bright,
Spirit of a winter’s night;
When the soundless earth is muffled,
And the caked snow is shuffled
From the ploughboy’s heavy shoon;
When the Night doth meet the Noon
In a dark conspiracy
To banish Even from her sky.
Sit thee there, and send abroad,
With a mind self-overaw’d,
Fancy, high-commission’d:–send her!
She has vassals to attend her:
She will bring, in spite of frost,
Beauties that the earth hath lost;
She will bring thee, all together,
All delights of summer weather;
All the buds and bells of May,
From dewy sward or thorny spray;
All the heaped Autumn’s wealth,
With a still, mysterious stealth:
She will mix these pleasures up
Like three fit wines in a cup,
And thou shalt quaff it:–thou shalt hear
Distant harvest-carols clear;
Rustle of the reaped corn;
Sweet birds antheming the morn:
And, in the same moment, hark!
‘Tis the early April lark,
Or the rooks, with busy caw,
Foraging for sticks and straw.
Thou shalt, at one glance, behold
The daisy and the marigold;
White-plum’d lillies, and the first
Hedge-grown primrose that hath burst;
Shaded hyacinth, alway
Sapphire queen of the mid-May;
And every leaf, and every flower
Pearled with the self-same shower.
Thou shalt see the field-mouse peep
Meagre from its celled sleep;
And the snake all winter-thin
Cast on sunny bank its skin;
Freckled nest-eggs thou shalt see
Hatching in the hawthorn-tree,
When the hen-bird’s wing doth rest
Quiet on her mossy nest;
Then the hurry and alarm
When the bee-hive casts its swarm;
Acorns ripe down-pattering,
While the autumn breezes sing.

Oh, sweet Fancy! let her loose;
Every thing is spoilt by use:
Where’s the cheek that doth not fade,
Too much gaz’d at? Where’s the maid
Whose lip mature is ever new?
Where’s the eye, however blue,
Doth not weary? Where’s the face
One would meet in every place?
Where’s the voice, however soft,
One would hear so very oft?
At a touch sweet Pleasure melteth
Like to bubbles when rain pelteth.
Let, then, winged Fancy find
Thee a mistress to thy mind:
Dulcet-ey’d as Ceres’ daughter,
Ere the God of Torment taught her
How to frown and how to chide;
With a waist and with a side
White as Hebe’s, when her zone
Slipt its golden clasp, and down
Fell her kirtle to her feet,
While she held the goblet sweet
And Jove grew languid.–Break the mesh
Of the Fancy’s silken leash;
Quickly break her prison-string
And such joys as these she’ll bring.–
Let the winged Fancy roam,
Pleasure never is at home.

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तुम इतना जो मुस्कुरा रही हो




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Arth (Hindi: अर्थ, in English: The Meaning) is a 1982 film directed by Mahesh Bhatt, starring Shabana Azmi, Kulbhushan Kharbanda, Smita Patil, Raj Kiran and Rohini Hattangadi. It features a memorable soundtrack by Ghazal duo, Jagjit Singh and Chitra Singh.

The semi-autobiographical film was written by Mahesh Bhatt about his extramarital relationship with actress Parveen Babi.[1] It is one of the 25 Must See Bollywood Movies as compiled by IndiatimesMovies.

Arth  is a wonderful, understated, brilliant film about marital infidelity.  Shabana Azmi gives a quiet and simmering performance punctuated by moments of rage.  It is one of the iconic performances of her career, and netted her the second of her five National Film Awards.   Arth’s soundtrack is layered with beautiful ghazals by Jagjit Singh that are haunting, sweet, and gorgeous. “Tum itna jo muskura rahe ho,” which Raj sings to Pooja on her birthday, is a very famous song, with tender, bittersweet lyrics by Shabana’s father Kaifi Azmi; its refrain means “you who are smiling so, what sorrows are you hiding?”   It quickly became one of my favorite songs ever, and the other ghazals are lovely as well.Track : Tum jo itna jo muskara rahe ho
Siger : Jagjit Singh
Music :Jagjit Singh
Lyrics : Kaifi Aazmi

***
Tum jo itna jo muskara rahe ho,
kya gam hai jiske chhupa rahe ho.Aankhon mein nami hansi laboN par,
kya haal hai kya dikha rahe ho.

Ban jayenga zehar pite pite,
ye ashq jo pite ja rahe ho.

Jin zakhmoN ko waqt bhar chala hai,
tum kyun unhe chhede ja rahe ho.

RekhaoN ka khel hai muqadar,
rekhaoN se maat kha rahe ho.
***
तुम जो इतना जो मुस्करा रहे हो,
क्या गम है जिसके छुपा रहे हो.

आंखों में नमी हंसी लबों पर,
क्या हाल है क्या दिखा रहे हो.

बन जायेगा ज़हर पीते पीते,
ये अश्क जो पीते जा रहे हो.

जीन ज़ख्मों को वक़्त भर चला है,
तुम क्यों उन्हें छेडे जा रहे हो.

रेखाओं का खेल है मुक़दर,
रेखाओं से मात खा रहे हो.
***


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Kabhi Kabhi Mere Dil Mein


Kabhi Kabhie (1976)

Kabhi Kabhie  is a 1976 Bollywood film, produced and directed by Yash Chopra, and starring an ensemble cast. This was Yash Chopra’s second directorial film with Amitabh Bachchan and Shashi Kapoor in the lead roles after Deewar and was particularly noted for its soundtrack compositions by Khayyam, who won Filmfare Award for Best Music, while film lyricist Sahir Ludhianvi won the Best Lyricist Award for “Kabhi Kabhie Mere Dil Mein,” the song which also got singer Mukesh, the Best Male Playback Singer award.

* The concept came to Yash Chopra while he was reading a poem by his longtime friend (and also the film’s lyricist) Sahir Ludhianvi . Initially, the story just centered on Amit, Pooja, Vijay and Anjali, but Pamela Chopra read an article in a magazine about a woman meeting her adopted child. Yash Chopra thought it good enough to make it a sub-plot in the film.

* There are two versions of the poem “Kabhi Kabhie” – one is the romantic poem Amit sings to Pooja when they are in love, and the other version, rewritten by a shattered Amit since the marriage of Pooja to Vijay, is a bitter, self-hating ode of misery and loss. Sahir Ludhianvi wrote this version of “Kabhi Kabhie” first; the more romantic version was written for the film.

* The film was supposed to open with Amit standing under a tree and watching Pooja get married. Traditionally in a Hindi “shaadi” (wedding) ceremony, there were to be seven “pheras” (circuits) around the altar; therefore there would be seven different love scenes between Amit and Pooja intercut with each phera. This was deemed too artistic a beginning for the film, so a few days were spent re-shooting the simple scenes of Amit reciting poetry and meeting Pooja.

This is the poem which has been moulded in the song. Listen it in the mountainous voice of the Shenshah of Bollywood, Amitabh Bhachhan.

***
Kabhi kabhi mere dil main khayal aata hain
Ki zindagi teri zulfon ki narm chhaon main guzarne pati
to shadab ho bhi sakti thi.

Yeh ranj-o-gham ki siyahi jo dil pe chhayi hain
Teri nazar ki shuaon main kho bhi sakti thi.

Magar yeh ho na saka aur ab ye aalam hain
Ki tu nahin, tera gham teri justjoo bhi nahin.

Guzar rahi hain kuchh iss tarah zindagi jaise,
isse kisi ke sahare ki aarzoo bhi nahin.

Na koi raah, na manzil, na roshni ka suraag
Bhatak rahin hai andheron main zindagi meri.

Inhi andheron main reh jaoonga kabhi kho kar
Main janta hoon meri hum-nafas, magar yoonhi
Kabhi kabhi mere dil main khayal aata hai.
***
कभी कभी मेरे दिल मैं ख्याल आता हैं
कि ज़िंदगी तेरी जुल्फों कि नर्म छांव मैं गुजरने पाती
तो शादाब हो भी सकती थी।

यह रंज-ओ-ग़म कि सियाही जो दिल पे छाई हैं
तेरी नज़र कि शुओं मैं खो भी सकती थी।

मगर यह हो न सका और अब ये आलम हैं
कि तू नहीं, तेरा ग़म तेरी जुस्तजू भी नहीं।

गुज़र रही हैं कुछ इस तरह ज़िंदगी जैसे,
इससे किसी के सहारे कि आरझु भी नहीं.

न कोई राह, न मंजिल, न रौशनी का सुराग
भटक रहीं है अंधेरों मैं ज़िंदगी मेरी.

इन्ही अंधेरों मैं रह जाऊँगा कभी खो कर
मैं जानता हूँ मेरी हम-नफस, मगर यूंही

कभी कभी मेरे दिल मैं ख्याल आता है.
***

शादाब /Shadab=fresh,delightful
रंज/Ranj=distress,grief
जुस्तजू /Justjoo=desire
हम-नफस/Hum-nafas=companion,friend

 

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